उत्तर प्रदेश

यूपी में साइबर ठगी पर कसा शिकंजा, 874 करोड़ फ्रीज

Kavita2
3 Oct 2026 2:58 PM IST
यूपी में साइबर ठगी पर कसा शिकंजा, 874 करोड़ फ्रीज
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में साइबर अपराध और संगठित अपराध के खिलाफ पुलिस एवं प्रशासन की ओर से की गई कार्रवाई के आंकड़े सामने आए हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, साइबर अपराध से जुड़े मामलों में अब तक 874 करोड़ 58 लाख रुपये से अधिक की धनराशि फ्रीज या होल्ड कराई गई है। वहीं अलग-अलग मामलों में 23,601 इनामी अपराधियों की गिरफ्तारी की गई है। इसके अलावा गैंगस्टर एक्ट के तहत 15,233 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की अवैध चल-अचल संपत्तियां जब्त किए जाने की जानकारी दी गई है। इन आंकड़ों के जरिए प्रदेश में साइबर और संगठित अपराध के खिलाफ चल रही कार्रवाई के दायरे को बताया गया है।

साइबर अपराध के बढ़ते मामलों के बीच उत्तर प्रदेश पुलिस ने राज्य के सभी 75 जिलों में साइबर क्राइम थाने संचालित किए हैं। इसके साथ ही जनपद स्तर पर पुलिस थानों में साइबर सेल और हेल्प डेस्क की व्यवस्था भी की गई है। उत्तर प्रदेश पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट पर साइबर अपराध की शिकायत और संबंधित साइबर पुलिस स्टेशनों की जानकारी उपलब्ध कराई गई है।

साइबर अपराध में 874 करोड़ से अधिक की रकम फ्रीज

साइबर ठगी के मामलों में सबसे बड़ी चुनौती पीड़ितों के खाते से निकली रकम को समय रहते रोकना होती है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक उत्तर प्रदेश में साइबर अपराध के मामलों में 874 करोड़ 58 लाख रुपये से अधिक की धनराशि फ्रीज या होल्ड कराई गई है। इसका उद्देश्य संदिग्ध खातों में पहुंची रकम को आगे ट्रांसफर होने से रोकना और पीड़ितों के धन की सुरक्षा के लिए कार्रवाई करना है।

उत्तर प्रदेश पुलिस साइबर अपराध की रोकथाम के लिए तकनीकी जांच, बैंकिंग लेनदेन की निगरानी और साइबर शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई जैसे उपायों का इस्तेमाल कर रही है। पुलिस की आधिकारिक साइबर क्राइम व्यवस्था में ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी की स्थिति में 1930 हेल्पलाइन पर शिकायत करने की जानकारी भी दी गई है।

सभी 75 जिलों में साइबर क्राइम थाने

प्रदेश में साइबर अपराध से निपटने के लिए सभी 75 जिलों में साइबर क्राइम थाने संचालित किए जा रहे हैं। इनके साथ पुलिस थानों में साइबर सेल और हेल्प डेस्क स्थापित किए गए हैं, ताकि स्थानीय स्तर पर साइबर धोखाधड़ी और ऑनलाइन अपराध से जुड़ी शिकायतों पर कार्रवाई की जा सके।

उत्तर प्रदेश पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट पर अलग-अलग साइबर पुलिस स्टेशनों के मोबाइल नंबर और ईमेल की जानकारी भी उपलब्ध है। इससे शिकायतकर्ताओं को संबंधित इकाई तक पहुंच बनाने में मदद मिल सकती है।

साइबर अपराध के बदलते स्वरूप को देखते हुए पुलिस के लिए तकनीकी विशेषज्ञता और जांच क्षमता बढ़ाना भी महत्वपूर्ण हो गया है। इस दिशा में प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण पर जोर दिए जाने की जानकारी उत्तर प्रदेश पुलिस की हालिया गतिविधियों में भी सामने आई है। मार्च 2026 की एक आधिकारिक पुलिस विज्ञप्ति में साइबर अपराध के उन्मूलन और पुलिस को तकनीकी रूप से प्रशिक्षित एवं सक्षम बनाने पर जोर दिए जाने का उल्लेख किया गया था।

23,601 इनामी अपराधियों की गिरफ्तारी

कानून-व्यवस्था से जुड़े आंकड़ों में 23,601 इनामी अपराधियों की गिरफ्तारी का भी उल्लेख है। इनामी अपराधियों में वे आरोपी शामिल होते हैं, जिनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की ओर से इनाम घोषित किया गया होता है। ऐसे मामलों में गिरफ्तारी लंबे समय से फरार आरोपियों तक पहुंचने के लिए पुलिस की कार्रवाई का हिस्सा होती है।

पुलिस की ओर से समय-समय पर वांछित और इनामी आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए विशेष अभियान चलाए जाते हैं। उत्तर प्रदेश पुलिस की वेबसाइट पर अलग-अलग जिलों में अपराधियों की गिरफ्तारी और कार्रवाई से संबंधित प्रेस विज्ञप्तियां भी नियमित रूप से प्रकाशित की जाती हैं।

गैंगस्टर एक्ट के तहत संपत्ति जब्ती

संगठित अपराध के खिलाफ कार्रवाई के हिस्से के रूप में गैंगस्टर एक्ट के तहत 15,233 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की अवैध चल-अचल संपत्तियों को जब्त किए जाने की जानकारी दी गई है। संपत्ति जब्ती का उद्देश्य अपराध से अर्जित या आपराधिक गतिविधियों से जुड़ी संपत्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करना है।

इस तरह की कार्रवाई में जमीन, मकान, वाहन और दूसरी संपत्तियां जांच के दायरे में आ सकती हैं। हालांकि किसी विशेष संपत्ति को अवैध या अपराध से अर्जित मानने का अंतिम आधार संबंधित मामले की कानूनी प्रक्रिया और सक्षम प्राधिकारी के निर्णय पर निर्भर करता है।

साइबर अपराध के खिलाफ राष्ट्रीय स्तर पर कार्रवाई

उत्तर प्रदेश में साइबर अपराध से जुड़े मामलों में कार्रवाई के आंकड़े सामने आने के बीच राज्य पुलिस की ओर से साइबर अपराध की रोकथाम के लिए लगातार तकनीकी उपायों पर जोर दिया जा रहा है। फरवरी 2026 की आधिकारिक पुलिस विज्ञप्ति में जनवरी के आंकड़ों के आधार पर साइबर अपराध की रकम फ्रीज कराने से जुड़े प्रदर्शन में उत्तर प्रदेश के राष्ट्रीय स्तर पर तीसरे स्थान पर आने की जानकारी दी गई थी। उस अवधि में 48 करोड़ 45 लाख 27 हजार रुपये फ्रीज किए जाने का उल्लेख था।

इससे यह भी संकेत मिलता है कि साइबर अपराध से जुड़े वित्तीय लेनदेन को रोकने के लिए बैंकिंग और पुलिस तंत्र के बीच समन्वय को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

ऑनलाइन ठगी में समय पर शिकायत जरूरी

साइबर अपराध के मामलों में रकम गंवाने के बाद शुरुआती समय में शिकायत दर्ज करना महत्वपूर्ण हो सकता है, क्योंकि डिजिटल लेनदेन के जरिए भेजी गई रकम को रोकने की संभावना समय के साथ कम हो सकती है। उत्तर प्रदेश पुलिस नागरिकों को ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में साइबर हेल्पलाइन 1930 का इस्तेमाल करने की जानकारी देती है।

इसके अलावा पुलिस की ओर से साइबर सुरक्षा से संबंधित दिशा-निर्देश भी उपलब्ध कराए गए हैं। इससे आम लोगों को ऑनलाइन ठगी, संदिग्ध लिंक, फर्जी निवेश प्रस्ताव और दूसरे डिजिटल अपराधों के प्रति सतर्क रहने में मदद मिल सकती है।

संगठित अपराध पर संपत्ति संबंधी कार्रवाई

गैंगस्टर एक्ट के तहत संपत्तियों की जब्ती संगठित अपराध के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का एक अलग पहलू है। पुलिस और प्रशासन की ओर से अपराधियों की संपत्ति की पहचान और उसके खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जाती है। उपलब्ध आंकड़े में 15,233 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियां जब्त किए जाने की बात कही गई है।

संपत्ति संबंधी कार्रवाई के दौरान कानूनी प्रक्रिया का पालन जरूरी होता है। किसी मामले में जब्त की गई संपत्ति को लेकर अंतिम स्थिति संबंधित न्यायिक या प्रशासनिक प्रक्रिया के आधार पर तय होती है।

अपराध नियंत्रण के लिए बहुस्तरीय व्यवस्था

उत्तर प्रदेश में अपराध नियंत्रण के लिए पुलिस कार्रवाई के साथ तकनीकी संसाधनों और प्रशासनिक तंत्र का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। साइबर अपराध के लिए अलग पुलिस थाने, जिला स्तर पर साइबर सेल और हेल्प डेस्क तथा वित्तीय लेनदेन को रोकने के लिए बैंकिंग तंत्र के साथ समन्वय इसी व्यवस्था का हिस्सा हैं।

वहीं संगठित अपराध और गैंगस्टर एक्ट से जुड़े मामलों में गिरफ्तारी तथा संपत्ति जब्ती जैसी कार्रवाई की जाती है। इन सभी कार्रवाइयों के आंकड़े राज्य में अपराध नियंत्रण के लिए अपनाए जा रहे अलग-अलग उपायों की तस्वीर पेश करते हैं।

आगे भी साइबर अपराध पर फोकस

डिजिटल लेनदेन और इंटरनेट के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर अपराध की प्रकृति लगातार बदल रही है। ऐसे में पुलिस के सामने ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी, फर्जी निवेश, डिजिटल पहचान के दुरुपयोग और दूसरे साइबर अपराधों से निपटने की चुनौती बनी हुई है।

उत्तर प्रदेश पुलिस की मौजूदा व्यवस्था में साइबर थानों, जिला साइबर सेल और हेल्प डेस्क के जरिए शिकायतों पर काम किया जा रहा है।

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 874 करोड़ 58 लाख रुपये से अधिक की साइबर अपराध राशि फ्रीज या होल्ड, 23,601 इनामी अपराधियों की गिरफ्तारी और 15,233 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति जब्ती प्रदेश में अपराध के अलग-अलग स्वरूपों के खिलाफ की गई कार्रवाई का हिस्सा है। इन आंकड़ों के साथ अब साइबर अपराध की रोकथाम, वित्तीय ठगी में त्वरित कार्रवाई और संगठित अपराध से जुड़े मामलों में कानूनी प्रक्रिया को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाना पुलिस एवं प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।

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